गीली गीली सौगातों के
ले कर ढली
उंगली छोड़ जिंदगी
आगे चली
परछाइयां वो कहां
खो गई
धूप जो आंगन से
गुल हो चली
थोड़ी सी अपनी
थोड़ी बेगानी
थोड़ी हकीकत है
थोड़ी कहानी
भरके है छलकती जिंदगी
उम्र ढलता छोड़ आयी जिंदगी
पल पल खेलती है जिंदगी

