आ ख्वाबों के रंग लुटा
जैसे तेरे मन में
झूले शामियाना
जैसे कोई बहार
बिन मौसम
बिन बहाने
खुशियों का आशियाना
हो आशियाना
तेरे मन की ये फुहार
बन गई है अब गुहार
जग सारा
अब जागे सारा
तेरे गीत की हुंकार
जैसे हो कोई पुकार
कल से रूठा, आज से जग क्यों
नाता, अपना तोड़े
आज का सुख
जी ले भर के
हैं धुआँ सा
जग कुआँ सा जो
प्यासा न जाने क्यों
अपनी घूँट
खुल के पी ले
तो झूमेगा ये जहां
हैं धुआँ सा
जग कुआँ सा जो
प्यासा न जाने क्यों
अपनी घूँट
खुल के पी ले
तो झूमेगा ये जहां
तेरे मन के अंगना में तो
ख्वाबों की बहारें हैं ना
बोलो न बोलो ना
वैसे जग के हर कतरे में
खुशियों की फुहारें है हाँ
देखो ना
ये जग सारा
जग उठे सारा
तेरे गीत हो मल्हार
ले के आये जो बहार
ये जग सारा
जग उठे सारा
तेरे गीत की हुंकार
जैसे हो कोई पुकार
कल से रूठा, आज से जग क्यों
नाता, अपना तोड़े
आज का सुख
जी ले भर के
हैं धुआँ सा
जग कुआँ सा जो
प्यासा न जाने क्यों
अपनी घूँट
खुल के पी ले
तो झूमेगा ये जहां
हैं धुआँ सा
जग कुआँ सा जो
प्यासा न जाने क्यों
अपनी घूँट
खुल के पी ले
तो झूमेगा ये जहां
झूमेगा ये जहां
झूमेगा ये जहां
झूमेगा ये जहां"

