किसका ख़याल कौन सी
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मंज़िल नज़र में रहे
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किसका ख़याल कौन सी
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मंज़िल नज़र में रहे
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साड़ियाँ गुज़र गयी के
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ज़माना सफ़र में है
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किसका ख़याल कौन सी
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हर ाश्क़ राज़े इश्क़
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है जो चस्मे तालमे है
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हर ाश्क़ राज़े इश्क़
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है जो चस्मे तालमे है
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आए दिल संभाल के बात
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अभी घर की घर में है
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आए दिल संभाल के बात
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अभी घर की घर में है
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साड़ियाँ गुज़र गयी के
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ज़माना सफ़र में है
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किसका ख़याल कौन सी
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सोचा था तुमसे डोर
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निकल जाएँगे कहीं
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निकल जाएँगे कहीं
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जाएँगे कहीं
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देखा तो हर मकाम
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तेरी रह गुज़र में है
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देखा तो हर मकाम
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तेरी रह गुज़र में है
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किसका ख़याल कौन सी मंज़िल
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कारी गारनशेर से पुच्छे कोई जीगल
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कारी गारनशेर से पुच्छे कोई जीगल
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सब कुच्छ तो है मगर
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ये कमी क्यूँ असर में है
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साड़ियाँ गुज़र गयी के
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ज़माना सफ़र में है
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किसका ख़याल कौन सी
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मंज़िल नज़र में रहे
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किसका ख़याल कौन सी
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