बिरंगे थे दिन
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बेरंगी शामें
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आई है तुमसे रंगिनियाँ
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फीके थे लम्हें
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जीने में सारे
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आई है तुमसे नमकीनियाँ
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बे इरादा रास्तों की
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बन गए हो मंज़िलें
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मुश्किलें हल हैं तुम्हीं से
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या तुम्हीं हो मुश्किलें
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तुम क्या मिले तुम क्या मिले
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हम ना रहे हम तुम क्या मिले
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जैसे मेरे दिल में खिले
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खाब के मौसम तुम क्या मिले
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तुम क्या मिले तुम क्या मिले
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तुम क्या मिले तुम क्या मिले
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कोरे कागज़ों की ही तरह है
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इश्क़ बिना जवानियाँ
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दर्ज हुई है शायरी में
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जिनकी है प्रेम कहानियाँ
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हम ज़माने की निगाहों में
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कभी गुमनाम थे
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अपने चर्चे कर रही हैं
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अब शेहेर की मेहफ़िलें
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तुम क्या मिले तुम क्या मिले
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हम ना रहे हम तुम क्या मिले
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जैसे मेरे दिल में खिले
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खाब के मौसम तुम क्या मिले
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तुम क्या मिले तुम क्या मिले
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तुम क्या मिले तुम क्या मिले
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